ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS:योग के 3 भाग जो ठीक करें मानसिक विकार 

Role of yoga in mental illness का आजकल की इस दुनिया में काफी ज्यादा रोल दिख रहा है आजकल हर कोई अपनी बिजी जिंदगी की भागा दौड़ी में हर कोई एक दूसरे से आगे निकलना चाहता है। वहीं इसी भागा दौड़ी में आज की पीढ़ी अपने शारीरिक या मानसिक हेल्थ का ध्यान रखना भूल ही गई है इस पीढ़ी के कहीं लोग मेंटल डिसऑर्डर से गुजर रहे हैं। जैसे एंजायटी डिप्रैशन माइग्रेन आदि की समस्या से जूझ रहे हैं।
WHO के अनुसार 2019 में दुनिया भर के मेंटल डिसऑर्डर वाले लोगों की संख्या 970 मिलियन है मेंटल डिसऑर्डर का इलाज होगा कि नहीं? प्रति मेंटल डिसऑर्डर कैसे को हम बिना किसी दवा के ठीक कर सकते हैं वह भी योग की मदद से और मानसिक ,शारीरिक ,सामाजिक ,आध्यात्मिक और आध्यात्मिक रूप से हेल्थ को भी सुधार सकते हैं।

योग से मेंटल डिसऑर्डर को कैसे ठीक करे।

योग हमको काफी तरीको से मेंटल हेल्थ को ठीक करने में मदद करता है। ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS में एंजाइटी, डिप्रेशन, स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैंऔर हमारे मेंटल हेल्थ पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। योग से हमारे सोने की योग्यता बढ़ता है। जिससे मूड फ्रेश रहता है, और हमेशा मूड बूस्ट रहता है।ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS योग की रोज़ाना अभ्यास से हम अपने शरीर के अंदरूनी शक्तियों को बढ़ा सकता हैं और अपने एक्शन सेंस वे अटेंशन सेंस को भी शांत कर सकते हैं। शारीरिक मुद्राओं से , सासाओ के व्यायाम से और ध्यान से हमारे मन को शांत करता हैं, ध्यान लगने में मदद करता हैं और शरीर कोआराम देता है।

अगर कोई मेंटल डिसऑर्डर से संघर्ष कर रहा है, तो उसके लिए ये बेहतर हैं कि वो किसी प्रोफेशनल एडवाइज़र यह थेरापिस्ट की मदद ले।

ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS

योग के भाग: ( ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS)

1 . आसन (physical posture):  अलगअलग प्रकार के आसन के अभ्यास से हम शरीर से तनाव को दूर कर सकते हैं, लचीलापन हासिल कर सकते हैं और जमीन से जुड़े रहते हैं। आसन से इंसान के शरीर के हार्मोन भी संतुलित होते हैं।ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS में आसनों को सही तरीके से करने से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। मानसिक विकारों में मदद करने वाले आसन।बाल मुद्रा, ऊपर की ओर मुख वाला कुत्ता, शवासन, कमल मुद्रा।

2. प्राणायाम (breathing exercise):–  श्वास पर ध्यान केंद्रित करने से हमरे तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है औरचिंता, अवसाद, तनाव कम होता है। प्राणायाम से हमारे मन की व्यायाम होते हैं जो हमारे मन को साफ और संत कृत कृत करते हैं।प्राणायाम श्वास के मदद से हमरे शरीर में प्राण ऊर्जा को संतुलित किया जाता है और बढ़ाया जाता है। प्राणायाम जो मानसिकस्वास्थ्य को ठीक करने में मदद करता है।नाड़ी शोधन (alternative breathing exercise) अनुपात 1:2:4, भ्रामरी प्राणायाम (bee breathing) का उपयोग करें।

3. ध्यान(meditation):– ध्यान करने से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और शरीर स्वस्थ रहता है। ध्यान के अभ्यास से इंसान आंतरिक शांति को प्राप्त हो सकता है। ध्यान इंसान की सकारात्मक सोच को खराब करता है। ध्यान से मानसिक विकार में मदद मिलती है।माइंडफुलनेस ध्यान, लव काइंडनेस ध्यान, गाइडेड ध्यान।यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि योग मानसिक स्वास्थ्य उपचार के लिए एक सहायक पूरक हो सकता है, लेकिन इसे पेशेवरमदद का स्थान नहीं लेना चाहिए।

ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS में यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक विकार का अनुभव कर रहा है, तो किसी योग्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से मार्गदर्शनलेना महत्वपूर्ण है।

मानसिक विकार के लिए योगिक आहार( ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS)

योगिक आहार ताजा, प्राकृतिक और सात्विक (शुद्ध) खाद्य पदार्थों के सेवन पर केंद्रित है जो मानसिक स्पष्टता और समग्र कल्याणको बढ़ावा देते हैं। योगिक आहार के कुछ प्रमुख सिद्धांतों में शामिल हैं:

1. सात्विक भोजन: ये ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो शुद्ध, हल्के और पचाने में आसान होते हैं। इनमें ताजे फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, मेवे, बीज और डेयरी उत्पाद शामिल हैं।

2. राजसिक और तामसिक भोजन से परहेज: राजसिक भोजन वे हैं जो अत्यधिक उत्तेजक होते हैं, जैसे मसालेदार या तले हुए  भोजन, कैफीन और शराब। तामसिक भोजन भारी और नीरस होते हैं, जैसे डिवेलप किया हुआ खाद्य पदार्थ, मांस और अत्यधिक मात्रा में चीनी या नमक। इन खाद्य पदार्थों को कम करने या इनसे बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि ये मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकतेहैं।

3. माइंडफुल ईटिंग: ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS में भोजन करते समय माइंडफुल ईटिंग का अभ्यास करना योगिक आहार का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इसमें भोजनके स्वाद, बनावट और संवेदनाओं के प्रति पूरी तरह मौजूद रहना और जागरूक होना शामिल है। यह शरीर के साथ गहरा संबंध बनाने और बेहतर पाचन को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

4. संयम: योगिक आहार में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने और संयमित भोजन करने पर जोर दिया जाता है। अपने शरीर की भूख और परिपूर्णता के संकेतों को सुनना और अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार खाना महत्वपूर्ण है।यह ध्यान देने योग्य है कि यद्यपि योगिक आहार मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन यह पेशेवर चिकित्सा सलाह या उपचार का विकल्प नहीं है।

यदि आप ROLE OF YOGA IN MENTAL ILLNESS हम मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का सामना कर रहे हैं, तो व्यक्तिगत मार्गदर्शन और सहायता के लिए स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करने की सिफारिश की जाती है। 

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